अग्रसेन जयंती 2020

क्षत्रिय समाज के राजा बल्लभ सेन के सबसे बड़े पुत्र महाराजा अग्रसेन को देवताओं के लिए दी जाने वाली पशुओ की बलि की प्रथा पसन्द नही थी इसीलिए उन्होंने क्षत्रिय धर्म को छोड़कर वैश्य धर्म अपना लिया था तभी उन्हें वैश्य समाज का जनक भी कहा जाता है महाराजा अग्रसेन के जन्म दिवस को अग्रसेन जयंती के रूप में मनाया जाता है अग्रसेन जयंती पर अग्रसेन के वंशज समुदाय द्वारा अग्रसेन महाराज जी की भव्य झांकी और शोभायात्रा निकाली जाती है और अग्रसेन महाराज का पूजन पाठ व आरती की जाती है 

 अग्रसेन जयंती कब है

इस वर्ष महाराजा अग्रसेन जयंती 2020 19 सितम्बर को पूरे भारत में पूर्ण उत्साह के साथ मनायी जाती हैमहाराजा अग्रसेन एक महान भारतीय राजा थे जिन्होंने अग्रवाल समुदायों के वंश का प्रतिनिधित्व किया उन्हें उत्तर भारत में व्यापारियों के नाम पर अग्रोहा का श्रेय दिया जाता है और यज्ञों में जानवरों को मारने से इनकार करते हुए उनकी करुणा के लिए जाने जाते हैं महाराजा अग्रसेन का जन्म अश्विन शुक्ल प्रतिपदा में हुआ जिसे अग्रसेन जयंती के रूप में मनाया जाता है नवरात्रि के प्रथम दिवस को अग्रसेन महराज जयंती के रूप में मनाया जाता है इस जयंती पर अग्रसेन के वंशज समुदाय द्वारा अग्रसेन महराज की भव्य झांकी व शोभायात्रा निकाली जाती है और अग्रसेन महाराज का पूजन पाठ , आरती किया जाता है 1976 में भारत सरकार ने महाराजा अग्रसेन के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया 

 अग्रसेन जयंती कैसे मनाते है? 

इस दिन अग्रवाल और अग्रगाही, महाराजा अग्रसेन की पूजा करते है देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है जिससे समृद्धि और खुशहाली बनी रहे व्यापार और बिजनेस में तरक्की होती रहे भक्त सुबह के समय अपने कुलदेवता के मन्दिर में जाकर पूजा करने जाते है

सभी स्थानों पर शोभा यात्रा निकाली जाती है यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गो से होकर निकलती है यात्रा में महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा को सजाया जाता है अग्रवाल और अग्रगाही समाज के लोग इस दिन अनेक तरह के सामाजिक कार्यक्रम जैसे भंडारा, गरीब लोगो को भोजन, कपड़ा दान जैसे कार्यक्रम करते है जगह जगह खाना खिलाया जाता है मेडिकल कैम्प लगाकर मरीजो का इलाज किया जाता है महाराजा अग्रसेन पर गोषठी होती है उनके योगदान और दी गयी शिक्षा के बारे में लोगो को बताया जाता है इस दिन सम्पूर्ण वैश्य समुदाय उनको याद करता है और उनके पद चिन्हों पर चलने का प्रयास करता है।

 महापुरुष और विश्वास

अग्रसेन सौर वंश के एक वैश्य राजा थे जिन्होंने अपने लोगों के लिए वनिका धर्म को अपनाया था वस्तुतः अग्रवाल का अर्थ है “अग्रसेन के बच्चों”या “अग्रसेन के लोग” हरियाणा क्षेत्र के हिसार के पास प्राचीन कुरु पंचला में एक शहर, जिसे अग्रसेन ने स्थापित किया था।

 महाराजा अग्रसेन जीवन परिचय 

महाराजा अग्रसेन महावीर महाकाव्य युग में द्वापर युग के अंतिम चरण के दौरान पैदा हुए सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा थे, वह भगवान कृष्ण के समकालीन थे। वह सूर्यवंशी राजा मन्धाता के वंश थेराजा मंधता के दो पुत्र थे, गुनाधि और मोहन, अग्रसेन प्रतापनगर के मोहन के वंशज राजा वल्लभ के सबसे बड़े बेटे थे अग्रसेन प्रतापनगर के मोहन के वंशज राजा वल्लभ और माता भगवती के सबसे बड़े बेटे थे अग्रसेन के 18 बच्चे हैं, जिनसे अग्रवाल गोत्र अस्तित्व में आया

 महाराजा अग्रसेन का विवाह 

अग्रसेन ने राजा नागराज कुमूद की बेटी माधवी के स्वयंवर में भाग लिया हालांकि, इंद्र, स्वर्ग के परमेश्वर और तूफान और वर्षा के स्वामी भी माधवी से शादी करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने अपने पति के रूप में अग्रसेन को चुना इंद्र ने यह सुनिश्चित करके बदला लेने का फैसला किया कि प्रतापनगर को बारिश नहीं मिली

नतीजन, एक अकाल ने अग्रसेन के राज्य को मारा, जिसने तब इंद्र के खिलाफ युद्ध लड़ने का फैसला किया नारद ऋषि को मध्यस्थ बना कर दोनों के बीच सुलह करवा दी

 तपस्या 

अग्रसेन ने आगरा शहर में शिव को प्रसन्न करने के लिए एक गंभीर (तपस्या) की शुरुआत की। शिव ने तपस्या से प्रसन्नता की और देवी को प्रसन्न करने की सलाह दी। अग्रसेन ने महालक्ष्मी पर फिर से ध्यान देना शुरू कर दिया, जो उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया।

 पशु बलि प्रथा को खत्म किया – जीव जंतुओ से प्रेम का संदेश दिया 

महाराजा अग्रसेन जीव जंतुओ से बहुत स्नेह और प्यार करते थे उस समय यज्ञों में पशुओं की बलि देने की प्रथा थी जब 18 यज्ञ शुरू हुए हर एक यज्ञ में जानवरों की बलि होने लगी इस तरह से 17 यज्ञ पूरे हो गये पर जब 18 वें यज्ञ के लिए जीवित पशु की बलि होने लगी तो महाराजा अग्रसेन को इस हिंसा से बहुत घृणा उत्पन्न हो गयी उन्होंने उसी वक्त बलि प्रथा को रोक दिया और घोषणा की कि उनके राज्य में कोई भी अब निर्दोष पशु की बलि नही देगा, ना ही कोई मांसाहार करेगा।सभी लोग जानवरों की रक्षा करेंगेमहाराजा अग्रसेन ने इसी वजह से सूर्यवंशी क्षत्रिय धर्म का त्याग कर दिया और वैश्य धर्म अपना लिया वैश्य धर्म में कोई भी मांसाहार नही करता है इस तरह हम देखते है की महाराजा अग्रसेन एक दयालु और जीव-जंतुओ से प्रेम करने वाले राजा थे

 महाराजा अग्रसेन के 3 आदर्श 

लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था

आर्थिक समानता व समरूपता

समाजिक समानता

महाराजा अग्रसेन का संयास

इन्होने 108 वर्षो तक अपने राज्य “अग्रोदय” में राज्य किया। फिर अपने कुलदेवी महालक्ष्मी से परामर्श कर आग्रेय गणराज्य की सत्ता अपने बड़े बेटे विभु को सौप दी और संयास ले लिया

 महाराजा अग्रसेन पर पुस्तके 

प्रसिद्द लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 1871 में “अग्रवालो की उत्पत्ति” नामक पुस्तक लिखी है जो बहुत ही प्रमाणिक जानकारी देती है

 महाराजा अग्रसेन की आरती : जय श्री अग्र हरे… 

जय श्री अग्र हरे, स्वामी जय श्री अग्र हरे..

कोटि कोटि नत मस्तक, सादर नमन करें ..!जय श्री!

आश्विन शुक्ल एकं, नृप वल्लभ जय! 

अग्र वंश संस्थापक, नागवंश ब्याहे..जय श्री!

केसरिया थ्वज फहरे, छात्र चवंर धारे! 

झांझ, नफीरी नौबत बाजत तब द्वारे ..जय श्री!

अग्रोहा राजधानी, इंद्र शरण आये! 

गोत्र अट्ठारह अनुपम, चारण गुंड गाये..जय श्री!

सत्य, अहिंसा पालक, न्याय, नीति, समता! 

ईंट, रूपए की रीति, प्रकट करे ममता..जय श्री 

ब्रहम्मा, विष्णु, शंकर, वर सिंहनी दीन्हा! 

कुल देवी महामाया, वैश्य करम कीन्हा..जय श्री!

अग्रसेन जी की आरती, जो कोई नर गाये

कहत त्रिलोक विनय से सुख संम्पति पाए.. जय श्री!

 महाराजा अग्रसेन द्वारा समाज को दिया गया संदेश 

हिंसा मत करो, अहिंसा को अपनाओ

जीव हत्या पाप है। जीव हत्या, बलि प्रथा समाप्त करो

समाजवादी बनो, न कोई अमीर हो न कोई गरीब, सभी एक समान हो

प्रजा से प्यार करो

लोकतंत्र की स्थापना करो

नैतिक मूल्यों का विकास करो

व्यापार और उद्योग करो जिससे सभी का पालन पोषण हो

गौपालन करो

Related Posts

Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

20,764FansLike
2,379FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Recent Stories

मेहंदी लगाकर की जाती है श्रृंगार

दोस्तों हरितालिका जिसे तीज भी कहा जाता है यह छत्तीसगढ़ में  बहुत ही प्रसिद्ध है इस पर्व में समस्त महिलाएं अपने मायके...

एकादशी के बारे में आज हम जानते है

दोस्तों हिन्दुधर्म में कई प्रकार के त्यौहार और व्रत किये जाते है ऐसे एक व्रत एकादशी के बारे में आज हम जानते...

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और मुख्य त्यौहार दीपावली की कथा के बारे में जानते है

आज के आर्टिकल में हम हिन्दू धर्म और छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और मुख्य त्यौहार दीपावली की कथा के बारे में जानते...

छत्तीसगढ़ में मनाए जाने वाले दशहरा पर्व

नमस्कार दोस्तों  चलिए आज हम बात करते है हमारे छत्तीसगढ़ में मनाए जाने वाले दशहरा पर्व एवं इसके पीछे...

विजयादशमी का पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम राम

हिन्दू धर्म के अनुसार यह विजयादशमी का पर्व मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रावण को दशमी तिथि के दिन मारे जाने के कारण...