गाँधी जयंती 2020

महात्मा गाँधी को कौन नही जानता है लेकिन क्या आप जानते है कि गाँधी जयंती क्यो मनाया जाता है ?यदि नही तो आज का आर्टिकल आपके बहुत जानकारी भरा होने वाला है क्योकि आज हम गाँधी जी और गाँधी जयंती के बारे मे काफी सारी जानकारी प्राप्त करेंगे 

गाँधी जयंतिबेक राष्ट्रीय अवकाश होता हैबजूसव 2 अक्टूबर को पूरे देश में हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है इस दिन को हमारे देशके राष्ट्रपिता गाँधी जी के जन्मदिवस पर उन्हें याद करने के लिए मनाया जाता है गाँधी जी को लोग बापू कहकर पुकारते थे 

 गाँधी जयंती क्या है?

गाँधी जयंती भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि इस दिन गाँधी जी का जन्म हुआ था  न केवल हम इस दिन को भारत में मनाते है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अहिंसा दिवस के रूप में मनाते है क्योंकि महात्मा गाँधी अहिंसा के प्रचारक थे इस दिवस पर राष्ट्रीय पिता महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में हुआ था महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्ति थे 

 गाँधी जी के बारे में 

गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था उन्हें “राष्ट्रपिता” के रूप में भी जाना जाता है स्वतंत्रता के संघर्ष में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए याद किया जाता है गाँधी जी का विवाह 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा से हुआ था गाँधी जी कानून का अध्ययन करने के लिए इंगलैंड गए थे चार साल बाद वह अपनी पूरी पढ़ाई करके भारत लौटे इस बीच उन्हें दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करने का अवसर मिला उन्हें दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा जब वह प्रथम श्रेणी की ट्रेन में यात्रा कर रहे थे तो गाँधी जी को एक अंग्रेज ने समान के साथ बॉक्स से बाहर निकल दिया था  इस प्रकार जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीयों के साथ अमानवीय व्यवहार और भेदभाव के खिलाफ  भारतीय कांग्रेस का गठन किया यह दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष के दौरान था कि गाँधी जी ने आत्म शुद्धता और सत्याग्रह के सिद्धांतों का भी इस्तेमाल करना शुरू किया उन्होंने भारतीयों को एकजुट किया और अंग्रेजी शासन के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई 21 साल दक्षिण अफ्रीका में रहने के बाद गाँधी 1915 में भारत लौट आये

भारत लौटने के बाद गाँधी जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए कई आंदोलनों के नेतृत्व किया वह एक कुशल राजनीतिज्ञ थे वह देश भर में घूमते रहेऔर लोगों को अपनी देशभक्ति के बारे में जागरूक किया पूरी दुनिया उन्हें अहिंसा के पुजारी के रूप मे याद करती है महात्मा गाँधी अपने सरल जीवन और उच्च आदर्शो के कारण भारतीयों के लोकप्रिय पिता बन गए स्वततंत्रता के लिए युद्ध के दौरान विभिन्न आंदोलन जैसे कि सविनय अवज्ञा अंग्रेजो भारत छोड़ो दांडी यात्रा के कारण गाँधी जी को 15 अगस्त 1947 को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया भारत को स्वतंत्र करने में गाँधी जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है इनके द्वारा भारतियों के हित में अंग्रेजों के विरुद्ध कई आंदोलन किये गए जिनका उद्देश्य भारतियों को उनका हक दिलवाना था इनका सिद्धांत अहिंसा के जरिये भारत को अंग्रेज़ों से आज़ादी दिलाना था गाँधीजी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक एहम राजनैतिक व् आध्यात्मिक नेता थे महात्मा गांधी जी भले ही आज हमारे बीच नहीं हो, किंतु उनके विचार प्रासंगिक है तथा पूरी दुनिया को रास्ता दिखाते हैं महात्मा गांधी जी के दर्शन के चार आधारभूत सिद्धांत है सत्य, अहिंसा, प्रेम और सद्‍भाव उनका विश्वास था कि सत्य ही परमेश्वर है, उन्होंने सत्य की आराधना को भक्ति माना मुंडकोपनिषद् से लिए गए राष्ट्रीय वाक्य सत्यमेव जयते के प्रेरणा स्रोत महात्मा गांधीजी हैं

21वीं सदी में भी महात्मा गाँधी के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे और वे ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, जिनका सामना आज विश्व कर रहा है एक ऐसे विश्व में जहां आतंकवाद, कट्टरपंथ, उग्रवाद और विचारहीन नफरत देशों और समुदायों को विभाजित कर रही है, वहां शांति और अहिंसा के महात्मा गाँधी के स्पष्ट आह्वान में मानवता को एकजुट करने की शक्ति है

 गाँधी जयंती कैसे मनाया जाता है ?

गाँधी जयंती को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता हैगांधी जयंती 2अक्टूबर को पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है इस दिन सरकारी अधिकारियों द्वारा दिल्ली के राजघाट पर तैयारियां की जाती हैं राजघाट महात्मा गांधी का समाधि स्थान है इस दिन राजघाट के समाधि स्थल को फूलों से सजाया जाता है और देश के सभी नेता राजघाट पर आकर देश के राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देते है समाधि के स्थान पर 2 अक्टूबर को सुबह प्रार्थना भी होती है और महात्मा गांधी जी के द्वारा दिए गए बलिदान को याद किया जाता है देश को आजादी दिलाने के अनोखे तरीके को भी याद किया जाता है क्योंकि बापू ने हमेशा अहिंसा का रास्ता चुना और अहिंसा का रास्ता चुनने की सीख दी राजघाट  नई दिल्ली में प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जाती है भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री महात्मा गाँधी के स्मारक पर प्रार्थना के दौरान मौजूद रहते है

उनका सबसे पसंदीदा और भक्ति गीत रघुपति राघव राजा राम उनकी याद में गाया जाता है भारत में पूरे स्कुलों द्वारा हर साल 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती मनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते है स्कुलो के छात्र उत्साह से गाँधी जयंती समारोह में भाग लेते है इस दिन को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है छात्र कविताओ का पाठ करते है और गाँधीवादी दर्शन पर अपनी खुद की जगहें पेश करते हैं छोटे बच्चे इस कार्यक्रम को गाँधी जी की पोशाक के साथ राष्ट्रवादी गीतो की प्रस्तुति देकर मनाते है छात्र बैनर का उपयोग करते हुए रैली में भाग लेते है 

पूरे भारत में लोग प्रार्थना सेवा,स्मारक समारोह और श्रद्धांजलि देते है कला विज्ञान एवं  निबन्ध की प्रतियोगिताओ का प्रदर्शन अहिंसक जीवन जीने के लिए पुरुस्कार की प्रस्तुतियां होती है

 मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन

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