खरीदारी श्रेष्ठ मुहूर्त – दोपहर 11.23 बजे से 01.12 बजे तक ,रात्रि 08.23से 10 बजे तक।
पूजन शुभ मुहूर्त -दोपहर 04.36 से शाम06 बजे तक

विशेष – नये बर्तन, सोना-चाँदी, वाहन का सायंकाल में खरीदी करें कुबेर की उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन करें सफेद मिष्ठान का भोग लगाएं, चावल आटे का दिया जलाएं।

मान्यता -समुद्र मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे. ऐसा कहा जाता है कि भगवान धन्वतंरि की पूजा से अरोग्यता की प्राप्ति होती है इस दिन वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है

यह त्योहार दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है यहां कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है इस दिन घर में लक्ष्मी का आवास मानते हैं इस दिन ही धन्वंतरि वैद्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुई थी इसीलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती जी कहते हैं

कथा – एक दिन भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने के लिए लक्ष्मी सहित भूमंडल पर आए कुछ देर बाद माता से बोले कि मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं तुम उधर मत देखना यह कह कर ज्यों ही भगवान ने राह पकड़ी त्योंही लक्ष्मी जी पीछे पीछे चल पड़ी कुछ ही दूर पर सरसों की खेती दिखाई दिया उसके बाद एक का खेत मिला वहीं लक्ष्मी जी ने श्रृंगार किया और एक ईख तोड़कर चूसने लगी तत्क्षण भगवान लौटे और यह देखकर लक्ष्मी जी पर क्रोधित होकर शाप दिया कि जिस किसान का खेत है 13 वर्ष तक उसकी सेवा करो ऐसा कहकर भगवान क्षीर सागर चले गए और लक्ष्मी ने किसान के यहां जाकर उसे धनधान्य से पूर्ण कर दिया तत्पश्चात 12 वर्ष के बाद लक्ष्मी जी जाने के लिए तैयार हुई किंतु किसान ने रोक लिया भगवान जब किसान के यहां लक्ष्मी को बुलाने आए तो किसान ने लक्ष्मी को नहीं जाने दिया तब भगवान हो लेकिन परिवार सहित गंगा में जाकर स्नान करो और इन कौंडियो को भी जल में छोड़ देना जब तक तुम नहीं लौट ओके तब तक मैं नहीं जाऊंगा किसान ने ऐसा ही किया जैसे ही उसने गंगा में कौड़िया डाली वैसी ही गंगा में चार चतुर्भुज निकले और कौड़िया लेकर चलने को उद्धत हुए तब किसान ने ऐसा आश्चर्य देख कर गंगा जी से पूछा कि यह चार भुजाएं किसकी थी?

गंगा जी ने बताया – हे किसान वे चारों हाथ मेरे ही थे तूने जो कौड़िया मुझे भेंट की है वे किस की दी हुई है

किसान बोला – मेरे घर में दो सज्जन आए हैं वही दे गए हैं

गंगा जी बोली – तुम्हारे घर जो स्त्री है वह लक्ष्मी है और जो पुरुष है वह भगवान विष्णु है तुम लक्ष्मी को ना जाने देना नहीं तो पुनः उसी भांति निर्धन हो जाओगे या सुनकर जब वह घर लौटा तो भगवान से बोला कि मैं लक्ष्मी जी को नहीं जाने दूंगा तब भगवान ने किसान को समझाया कि इनको मेरा श्राप था जो कि लक्ष्मी 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थी फिर लक्ष्मी चंचल होती है इन को बड़े-बड़े नहीं रोक रोक सके किसान से हट पूर्वक पुनः कहा नहीं मैं लक्ष्मी जी को नहीं जाने दूंगा इस पर लक्ष्मी जी ने स्वयं कहा कि है किसान यदि तुम मुझे रोकना चाहते हो तो सुनो कल तेरस है तुम अपना घर स्वच्छ रखो रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना तब मैं तुम्हारे घर में आऊंगी उस समय तो मेरी पूजा करना किंतु मैं तुम ही दिखाई नहीं दूंगी किसान ने कहा ठीक है मैं ऐसा ही करूंगा इतना कहा और लेने के बाद लक्ष्मी जी दसों दिशाओं में फैल गई भगवान देखते ही रह गए दूसरे दिन किसान ने लक्ष्मी जी के कथा अनुसार पूजन किया उसका घर धनधान्य से पूर्ण हो गया इसी भांति वह हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मी जी की पूजा करने लगा

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