14.11.2020 शनिवार कार्तिक मासे कॄष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 13 नवंबर को शाम 5 बजकर 59 मिनट से लग रही हैं औ र ये अगले दिन यानी कि 14 नवंबर को दिन में 2 बजकर 17 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि 14 नवंबर को है. अतः 14 नवंबर को ही नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी।

विशेष – यमदेव का पूजन करें काली मिट्टी का दिया बनाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके प्रार्थना करें ।
मान्यता – इस दिन यमराज की पूजा कर अकाल मृत्यु से मुक्ति और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जाती है। इसके अलावा नरक चौदस के दिन प्रात: काल सूर्य उदय से पहले शरीर पर तिल्ली का तेल मलकर और अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियां पानी में डालकर स्नान करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है और मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
इस दिन को लेकर कुछ कथाएं प्रचलित है

*रूप चौदस* -  रूप चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है।  पुरातन काल में नरकासुर नामक एक राक्षस ने देवता और संतों की 16 हज़ार स्त्रियों को बंधक बना लिया। नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर समस्त देवता और साधु-संत भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए, नरकासुर को स्त्री के हाथों से मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से 16 हजार स्त्रियों को आजाद कराया बाद में ये सभी स्त्री भगवान श्री कृष्ण की 16 हजार पट रानियां के नाम से जानी जाने लगी

नरकासुर के वध के बाद लोगों ने कार्तिक मास की अमावस्या को अपने घरों में दीये जलाए और तभी से नरक चतुर्दशी और दीपावली का त्यौहार मनाया जाने लगा एवं भगवान विष्णु ने वामन अवतार के समय त्रयोदशी से अमावस्या की अवधि के बीच दैत्यराज बलि के राज्य को 3 कदम में नाप दिया था। इसके बाद भगवान वामन ने बलि से वरदान मांगने को कहा। दैत्यराज बलि ने कहा कि हे प्रभु, त्रयोदशी से अमावस्या की अवधि में इन तीनों दिनों में हर वर्ष मेरा राज्य रहना चाहिए। इस दौरान जो मनुष्य में मेरे राज्य में दीपावली मनाए उसके घर में लक्ष्मी का वास हो और चतुर्दशी के दिन नरक के लिए दीपों का दान करे, उनके सभी पितर नरक में ना रहें और ना उन्हें यमराज यातना ना दें,राजा बलि की बात सुनकर भगवान वामन प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया।

  • कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी का दिन नरक चतुर्दशी का पर्व माना गया है इसी दिन नरक से मुक्ति पाने के लिए प्रातः काल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ा )का पौधा के सहित जल से स्नान करना चाहिए इस दिन शाम को यमराज के लिए दीप दान करना चाहिए कहा जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर नामक दैत्य का संहार किया था कथा – प्राचीन समय में रंतिदेव नामक राजा रहता था वह पहले जन्म में धर्मात्मा गाने था उसी पूर्व कृत कर्मों से इसी जन्म में भी राजा ने अपार दान आदि करके सत्कार्य किए जब उसका अंत समय आया तब यमराज के दूत उन्हें लेने आए जो बार-बार राजा को लाल-लाल आंखें निकालकर कह रहे थे राजन नर्क में चलो तुम्हें वही चलना पड़ेगा इस पर राजा घबराया और नर्क में चलने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा राजन आपने जो कुछ दान पूर्ण किया है उसे तो अखिल विश्व जानता है किंतु पाप केवल भगवान और धर्मराज जानते हैं राजा बोला उस पाप को मुझे भी बताओ जिससे उसका निवारण कर सकूं
    उन्होंने कहा एक बार तेरे द्वार से भूख से व्याकुल एक ब्राम्हण लौट गया था इससे तुझे आना पड़ेगा की यह सुनकर राजा ने यमदूतों से विनती की कि मेरी मेरी मृत्यु के बाद मेरी आयु आयु 1 वर्ष बढ़ा दी जाए इस विषय को दूतो ने बिना सोच-विचार किए ही स्वीकार कर लिया और राजा की आयु 1 वर्ष बढ़ा दी गई
    राजा ने ऋषियों के पास जाकर इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा ऋषियों ने बतलाया हे राजन तुम कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी व्रत रहकर भगवान कृष्ण की पूजा करना तथा दान देकर सब अपराध सुना कर क्षमा मांगना तब तुम पाप मुक्त हो जाओगे राजा नहीं नियम पूर्वक व्रत किया और अंत में उसने विष्णु लोक को प्राप्त किया। और इसलिए नरक चतुर्दशी मनाया जाता है

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