16.11.2020सोमवार कार्तिक मासे शुक्ल पक्ष प्रथमी/ द्वितीया तिथि ।

विशेष➡️भाई को भोजन कराकर तिलक (उपहार)भेंट करें भाई के दीर्घायु हेतु ।

मान्यता 👉कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्व काल में यमुना ने यमदेव को अपने घर पर सत्कारपूर्वक भोजन कराया था| जिससे उस दिन नारकी जीवों को यातना से छुटकारा मिला और वे तृप्त हुए| पाप मुक्त होकर वे सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त हो गए | उन सब ने मिलकर एक महान उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था| इसी वजह से यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई| जिस तिथि को यमुना ने यम को अपने घर भोजन कराया था, यदि उस तिथि को भाई अपनी बहन के हाथ का उत्तम भोजन ग्रहण करता है तो उसे उत्तम भोजन के साथ धन की प्राप्ति होती है| और मनुष्य यमलोक की यातनायें नहीं भोगता अर्थात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है|

यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाता है या भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है इस दिन भाई बहन को साथ-साथ यमुना स्नान करना तिलक लगाना तथा बहन के घर जाकर भोजन करना फलदाई होता है इस दिन बहन भाई की पूजा करके उसके दीर्घायु तथा अपने सुहाग की कामना से हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती हैं इसी दिन सूर्य कन्या जमुना जी से अपने भाई हेमराज को भोजन कराया था इसीलिए इसे यम द्वितीया कहते हैं इस दिन श्रद्धा बनत भाई को स्वर्ण मुद्रा वस्त्र आदि बहन को देना चाहिए।
कथा – सूर्य भगवान की स्त्री का नाम संज्ञादेवी था इनकी दो संताने पुत्र यमराज तथा कन्या यमुना थी संध्या अपने पति सूर्य की किरणों को न सह सकने के कारण उत्तरी ध्रुव प्रदेश में छाया बनकर रहने लगी उसी छाया से ताप्ती नदी तथा शनिश्वर का जन्म हुआ इसी छाया से अश्विनी कुमारों का भी जन्म हुआ बतलाया जाता है जो देवताओं के वैद्य मनाए जाते हैं इधर छाया कायम तथा यमुना से ही माता का व्यवहार होने लगा इन से खिन्न होकर हमने अपनी एक नई नगरी या बुरी बस आई यम बुरी में भाभियों को दंड देने का कार्य संपादित करते भाई को देखकर यमुना जी गोलोक चली आई जो कि कृष्णा अवतार के समय भी थी बहुत समय व्यतीत हो जाने पर एक दिन यम को अपनी बहन की याद आई उन्होंने दूतों को भेजकर यमुना को बहुत खुश आया मगर मिलना सकी फिर यमराज स्वयं ही गोल हो गए वहां विश्राम घाट पर यमुना जी से भेंट हुई भाई को देखते ही यमुना ने हर्ष विभोर स्वागत सत्कार किया तथा भोजन करवाया इससे प्रसन्न हो या ने वर मांगने को कहा उन्होंने कहा यह भैया मैं आपसे यह वरदान मांगती हूं कि मेरे घर में स्नान करने वाले नर नारी यमलोक न जाये प्रश्न बड़ा कठिन था उनके ऐसा वर देने से यमपुरी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता भाई को असमंजस में देखकर आप चिंता ना करें मुझे यह वरदान दे कि जो लोग आज के दिन बहन के यहां भोजन करके इस मथुरा नदी स्थित विश्राम घाट पर स्नान करे वह तुम्हारे लोग ना जाए इसे यमराज ने स्वीकार कर लिया इस तिथि को जो सज्जन के घर जाकर भोजन नहीं करेंगे उन्हें में बांधकर यमपुरी ले आऊंगा और तुम्हारे जल में स्नान करने वालों को स्वर्ग होगा तभी से यह त्यौहार मनाया जाता है

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