मासिक दुर्गा अष्टमी 2020

मासिक दुर्गा अष्टमी पर माँ दुर्गा की विधि विधान की पूजा की जाती है  मासिक दुर्गाष्टमी का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. लोग इस दिन व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा-उपासना करते हैं. हर महीने में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी कहा जाता हैइस दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी कष्ट दूर होते हैं. हर तरह की सुख, समृद्धि, संपन्‍नता की प्राप्ति होती है. मनोकमानएं पूर्ण होती हैं. साल 2020 में चैत्र माह से मार्गशीष माह तक के दुर्गाष्टमी व्रत इस प्रकार हैं-

◆1 अप्रैल बुधवार चैत्र माह

◆1 मई शुक्रवार वैशाख माह

◆30 मई शनिवार ज्येष्ठ माह

◆28 जून रविवार आषाढ़ माह

◆27 जुलाई सोमवार श्रावण माह

◆26 अगस्त बुधवार भाद्रपद माह

◆24 सितंबर बृहस्पतिवार प्रथम अधिक मास – आश्विन माह

◆23 अक्तूबर शुक्रवार द्वित्तीय शुद्ध आश्विन माह

◆22 नवंबर रविवार कार्तिक माह

◆22 दिसंबर मंगलवार मार्गशीर्ष माह

 मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा 

सदियों पहले पृथ्वी पर असुर बहुत शक्तिशाली हो गए थे वे स्वर्ग पर चढ़ाई करने लगे थे उन्होंने कई देवताओं को मार डाला और स्वर्ग में हलचल मचा दी इन सबमें सबसे शक्तिशाली असुर महिषासुर था 

तब उसका अंत करने के लिए भगवान शिव , और भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने शक्ति स्वरूप देवी दुर्गा को मनाया हर देवता ने देवी दुर्गा को विशेष हथियार प्रदान किए इसके बाद आदिशक्ति दुर्गा ने पृथ्वी पर आकर असुरो का वध किया माँ दुर्गा ने महिषासुर की सेना के साथ युद्ध किया और अंत में उसे मार दिया उस दिन से दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ 

 व्रत पूजन विधि 

प्रातः जल्दी उठकर स्नान ध्यान करें। 

व्रत का संकल्प लें. मां का पूजन करें।

दुर्गा पूजा में मां का वस्त्र, आभूषणों द्वारा श्रंगार करें।

धूप, दीप से देवी की पूजा करें।

पूजा के अंत में मां की आरती गाएं।

मां को प्रसाद में हलवा-पूरी, खीर, उबले चने आदि का भोग लगाएं।

मां की पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें।

पूजा करते समय लाल रंग के ऊनी आसन का प्रयोग करना चाहिए उसके ऊपर बैठकर नर्वाण मन्त्र का जाप करें- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै: 

 विशेष 

आपके लिए कुछ भी संभव न हो तो केवल कम से कम 9 कन्याओं का पूजन करें और साथ में एक बालक को बिठाये कन्या की उम्र 2 वर्ष से लेकर 9 वर्ष तक होनी चाहिए उन्हें उनकी मनपसन्द का भोजन और उपहार दें नवदुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाएं 

 न करें ये गलतियां 

माँ की पूजा में तुलसी,आवला, दूर्वा,मदार और आक के फूल इस्तेमाल नही होते 

घर में एक से अधिक माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र न रखें 

 वास्तु का रखें ध्यान 

सुख समृद्धि के लिए आग्नेय कोण में ज्योति लगाए 

माँ की प्रतिमा चन्दन की चौकी पर सजाये इससे घर में सकारात्मकता का प्रवाह बढ़ेगा और वास्तुदोषों का नाश होगा 

पूजा करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें 

पूजा का समान दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें

घर के वातावरण को पवित्र करने के लिए गुंगुल , लोभान , कपूर , देशी घी आदि का प्रयोग करें 

उत्तर पूर्व दिशा में  स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं

 108 बार जाप करें इस मंत्र का 

 सर्व मंगल मांगल्ये , शिवे सर्वार्थ साधिके 

 शरण्येत्र्यंबके गौरी , नारायणी नमोस्तुते 

इस मंत्र का जाप करने से भी माँ  भगवती प्रसन्न हो जाती है यदि आप दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ नही कर पाते हैं तो ऊपर दिए गए मन्त्र का 108 बार जाप करने से भी माँ भगवती को प्रसन्न किया जा सकता है मासिक दुर्गाष्टमी का बहुत ही धार्मिक महत्व है

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