सांझी का त्यौहार लगते ही पूर्णमासी से अमावस्या तक मनाया जाता है कुंवारी लड़कियों को घरों में सांझी का पूजन करना चाहिए दीवार पर गोबर से सांझी सांझा की मूर्ति बनाकर उसका भोग लगाना चाहिए 15 दिन अमावस्या पर गोबर से विशाल कोट बनाकर पूजा करनी चाहिए जिस लड़की की शादी हो जाए तो वह शादी के केवल उसी वर्ष 16 कोटों की 16 घर जा कर पूजा करें भोग लगाएं इससे लड़कियों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है

यह त्यौहार राजस्थान ,गुजरात, हरियाणा में और बिहार में मुख्य रूप से मनाया जाता है इस त्यौहार में में घरों के बाहर दीवारों पर गाय के गोबर से लड़कियां विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बनाती हैं और उन्हें हार ,चूड़ी, फूल, सिंदूर और अनेक कपड़े से सजाया जाता हैं और समूह में संध्या के समय पूजा की जाती है वहां पर ही कहीं दिया जलाए जाते हैं और अनेक मीठे गीत गाए जाते हैं फिर अंतिम में प्रसाद वितरण किया जाता है अंतिम 5 दिनों में हाथी घोड़े गाड़ी आदि की आकृति बनाई जाती है और 16 वें दिन अमावस्या को सांझी देवी को दीवाल से उतारकर मिट्टी के घड़े में बैठाया जाता है और सामने दिया जला कर रखा जाता है फिर उनका विसर्जन होता

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